चकिया में सरकारी अस्पताल के बगल में संचालित सर्वेश्वरी हॉस्पिटल पर उठे सवाल, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल
कथित अनियमितताओं के बीच मरीजों की सुरक्षा पर चिंता, अस्पताल के पंजीकरण, डॉक्टरों की योग्यता और प्रशिक्षित स्टाफ की जांच कराने की उठी मांग
चकिया (चंदौली)। उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताती है, वहीं दूसरी ओर चंदौली जनपद के चकिया में निजी अस्पतालों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के बीच सरकारी अस्पताल के समीप संचालित सर्वेश्वरी हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल में निर्धारित मानकों के अनुपालन, पंजीकरण, डॉक्टरों की योग्यता और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि चकिया क्षेत्र में मानकों के विपरीत संचालित अस्पतालों को लेकर विभिन्न समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों और डिजिटल पोर्टलों पर खबरें प्रकाशित होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में विभाग की निगरानी व्यवस्था और शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मरीजों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं
सर्वेश्वरी हॉस्पिटल को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की सत्यता की जांच करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। यदि अस्पताल बिना वैध पंजीकरण के संचालित हो रहा है, वहां निर्धारित योग्यता वाले चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं अथवा अप्रशिक्षित कर्मचारियों से मरीजों का इलाज कराया जा रहा है, तो यह मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी मरीज के इलाज के दौरान लापरवाही या कोई गंभीर घटना होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? अस्पतालों के संचालन में नियमों का पालन सुनिश्चित करना और मरीजों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल, जांच की मांग तेज
क्षेत्र में उठ रहे सवालों के बीच जिला स्वास्थ्य विभाग से मांग की जा रही है कि सर्वेश्वरी हॉस्पिटल के पंजीकरण प्रमाणपत्र, चिकित्सकों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता, कर्मचारियों के प्रशिक्षण, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और अन्य निर्धारित मानकों की जांच कराई जाए। जांच के दौरान यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अस्पताल के संचालन की अब तक कितनी बार जांच हुई है और यदि कोई शिकायत प्राप्त हुई, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई। पारदर्शिता के लिए जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक करना भी जरूरी है।
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम जनता के जीवन से जुड़ी हैं। ऐसे में किसी भी अस्पताल के संचालन में नियमों की अनदेखी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। चकिया के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके क्षेत्र में संचालित अस्पताल निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
अब निगाहें जिला स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों पर टिकी हैं। जरूरत है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सवाल सिर्फ एक अस्पताल का नहीं, बल्कि उन मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य व्यवस्था पर जनता के भरोसे का है, जो इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों की जांच कर कार्रवाई करता है या मरीजों की सुरक्षा से जुड़े ये सवाल यूं ही अनुत्तरित रह जाते हैं।
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