सिंचाई विभाग की लापरवाही से डूबी किसानों की फसलें, गुलाल बांध के तीनों फाटक खोलने पर उठे सवाल
सिंचाई विभाग की लापरवाही से डूबी किसानों की फसलें, गुलाल बांध के तीनों फाटक खोलने पर उठे सवाल
चार दिनों से लगातार बहाया जा रहा बांध का पानी, खेतों में जलभराव से किसान परेशान — किसानों ने पूछा, आखिर इतनी जल्दी पानी छोड़ने की क्या थी जरूरत?
शिकारगंज/चकिया ( जनतंत्र की आवाज )
एक तरफ लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र में चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर सिंचाई विभाग द्वारा गुलाल बांध के तीनों फाटक खोल दिए जाने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पिछले करीब चार दिनों से बांध का पानी लगातार बहाए जाने के कारण आसपास के खेतों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई किसानों की फसलें पानी में डूब गई हैं, जबकि बड़ी संख्या में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
किसानों का आरोप है कि जब क्षेत्र पहले से ही भारी बारिश और जलभराव की समस्या से जूझ रहा है, ऐसे समय में बांध के तीनों फाटक खोलकर पानी का अनावश्यक बहाव कराया जाना समझ से परे है। किसानों के मुताबिक बांध पूरी तरह भरने में अभी लगभग तीन फीट पानी की गुंजाइश बाकी थी, इसके बावजूद सिंचाई विभाग द्वारा पानी छोड़ने का फैसला लिया गया।
किसानों का कहना है कि यदि बांध का पानी सुरक्षित रखा जाता तो आने वाले कृषि सीजन में यही पानी उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होता। इससे किसान सिंचाई की सुविधा का लाभ लेकर अपनी फसलें तैयार कर सकते थे। लेकिन समय से पहले पानी बहाए जाने से एक ओर वर्तमान फसलों को नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी किसानों में चिंता बढ़ गई है।
क्या बांध को टूटने का था खतरा?
किसानों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी, जिसके चलते बांध के तीनों फाटक खोलने पड़े? जब बांध के पूरी तरह भरने में करीब तीन फीट की जगह बाकी थी और किसानों के अनुसार बांध को टूटने या क्षतिग्रस्त होने का तत्काल कोई खतरा नजर नहीं आ रहा था, तो फिर पानी को इतनी जल्दी क्यों बहाया गया?
लगातार पानी छोड़े जाने से खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि एक तरफ प्रकृति की मार और दूसरी तरफ विभागीय निर्णय, दोनों का खामियाजा आखिर किसान ही क्यों भुगते?
अब किसानों की निगाहें सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं। किसानों ने मांग की है कि खेतों में हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि बांध के तीनों फाटक खोलने का निर्णय किन परिस्थितियों में और किसके निर्देश पर लिया गया।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—जब बांध को टूटने का तत्काल कोई खतरा नहीं था, तो किसानों के हित में उपयोग होने वाले पानी को समय से पहले बहाने की आखिर क्या मजबूरी थी? इसका जवाब कौन देगा?
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